मानसून को लेकर जिला प्रशासन की बड़ी बैठक आयोजित, मुस्तैदी पर हुई चर्चा

धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) आगामी मानसून सीजन को लेकर कांगड़ा प्रशासन अलर्ट मॉड में आ गया है, आज जिलाधीश कांगड़ा हेमराज बैरवा की अध्यक्षता में सभी उपमंडलाधिकारियों और प्रशासनिक आला अधिकारियों के साथ भी एक बैठक आयोजित हुई, जिसमें मानसून सीजन में कैसे प्राकृतिक आपदाओं से निपटना है और उसके लिए किस तरह की तैयारियां होनी चाहिए इस पर विस्तृत चर्चा हुई,

ADM शिल्पी वेक्टा ने व्यक्त की भविष्य की योजना

इस बाबत जानकारी साझा करते हुए ADM शिल्पी वेकटा ने कहा कि यूं तो सभी सब डिवीजन लेवल पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं फिर भी भारी बारिश के दौरान होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए कैसे राहत और बचाव कार्य किए जाएं इस पर चिंतन मंथन हुआ, उन्होंने कहा कि धर्मशाला में पहले से ही दो जेसीबी स्टैंड बाई मोड पर तैनात कर दी गई हैं, खड्डों नदी नालों की ओर जाने वाले लोगों कारोबारियों को पहले ही जिलाधीश की ओर से सख्त चेतावनी और गाइडलाइन जारी कर दी गई हैं अगर कोई उस गाइडलाइन की अवहेलना करेगा तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा,

उपमंडलाधिकारियों को ग्राउंड स्तर पर अलर्ट रहने के दिशा निर्देश

साथ ही ADM ने कहा कि अगर किसी को भी उनकी जान पहचान का शख्स खड्डों या नदी नालों की ओर जाता हुआ दिखाई देता है तो उसकी शिकायत DDMA को की जा सकती है, वहीं उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से हर लिहाज से मुस्तैदी कैसे बरती जाए इस पर विस्तृत चर्चा हुई है, वहीं उन्होंने मैक्लोडगंज धर्मशाला नेशनल हाइवे के बीच बीच में धंसने की बड़ी वजह पूर्व में हुई भारी बारिशों को बताया है और भविष्य में इसकी वजह से कोई परेशान न हो उससे निपटने के लिए NHAI के EXN के संपर्क में होने की भी बात कही है

बाइट – शिल्पी वेक्टा, ADM, धर्मशाला

बरसात शुरू होने जा रही है और हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत शहर धर्मशाला में फिर से भू स्खलन का खतरा मंडराने शुरू हो गया है, आखिर कैसे देखिए हमारी ये ख़ास रिपोर्ट ...

दरअसल धर्मशाला आज भी सिस्मिक जॉन 5 के तहत आता है और धर्मशाला के कोतवाली बाज़ार से लेकर ग्लोबल सिटी मैक्लोडगंज तक जगह जगह जमीन लगातार कई सालों से धंसती जा रही है, कई मर्तबा तो उस धंसती हुई जमीन में दो पहिया वाहन और चार पहिया वाहन भी दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं, नतीजतन इस पर फिर से बहस छिड़ गई है कि आखिर इसकी वजह क्या है और इसे रोका कैसे जाए, इसको लेकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के सीनियर प्रोफेसर और भू वैज्ञानिक अमरीश कुमार महाजन ने दावा किया है कि जब वो बाडिया इंस्टीट्यूट में शोध कर रहे थे तो पाया कि धर्मशाला मैक्लोडगंज की मिट्टी गीली मिट्टी में तब्दील हो चुकी है, जिसकी सबसे बड़ी वजह यहां का लचर ड्रेनेज सिस्टम है इसके अलावा अब तक भी सीवेज व्यवस्था को सही तरीके से कायम न कर पाना है, नतीजतन धर्मशाला में कोतवाली बाजार से लेकर दलाई लामा खड़ा डंडा रोड, चोला, चांदमारी मैक्लोडगंज समेत कई इलाकों में लगातार जमीन का धंसना है, उन्होंने कहा कि साल 1998 में उन्होंने रिसर्च के दौरान पाया कि यहां 28 ऐसे स्पॉट हैं जो कभी भी धंस सकते हैं और वो सब के सब भू स्खलन की जद्द में हैं, प्रोफेसर महाजन ने कहा कि जिस तरह से यहां कंस्ट्रक्शन हो रही है और सीमेंट्स रोड्स बनाए जा रहे हैं ये तब तक सुरक्षित नहीं जब तक यहां प्रॉपर ड्रेनेज सिस्टम को स्थापित नहीं किया जाता, उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का डर है कि अगर यहां साल 1905 की तरह फिर से कोई भूकंप आया तो यहां बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है, साथ ही उन्होंने ये दावा भी किया कि आज नहीं तो कल कम से कम 150 साल बाद तो इतिहास खुद को दोहरा ही सकता है तब स्थिति हमारे काबू में नहीं होगी…

प्रोफेसर अमरीश महाजन, भू वैज्ञानिक, CUHP

वहीं धर्मशाला की सड़कों को सुधारने का जिम्मा जिस PWD के पास है वो मानसून आते ही सतर्क हो जाता है, उस दौरान उनकी ओर से जगह जगह निर्माण कार्य छेड़ दिए जाते हैं बावजूद इसके उन खड्डों और धंसती हुई सड़कों को विभाग आज दिन तक प्रॉपर ठोस तरीके से मेंटेन नहीं कर पाया है, जब इस बाबत PWD अधिकारियों से बात की जाए तो उनकी ओर से कई तरह के तर्क-वितर्क पेश किए जाते हैं, PWD के SDO, DS ठाकुर ने बताया कि कोतवाली बाजार से लेकर कर्मू मोड तक सड़क के सुधारीकरण का कार्य बड़े ही युद्ध स्तर पर किया जा रहा है साथ ही धंस चुके खड्डों को भरने के लिए भी विभाग के उच्च अधिकारियों की ओर से दिशा निर्देश दिए गए हैं साथ ही उन्होंने बताया कि इसके पीछे आईपीएच विभाग को भी जिम्मेदारी से कार्य करने की जरूरत है कई जगहों पर तो आईपीएच विभाग की कार्यप्रणाली ही इन सब घटनाओं के लिए जिम्मेदार नजर आती है…

निष्कर्ष

चाहे कोई लाख दलीलें दे ले मगर सवाल आज भी ज्यों का त्यों बरकरार है कि धर्मशाला जैसा शहर जो कि सिस्मिक जॉन 5 में आता है, भू वैज्ञानिक बार बार हमारे हुक्मरानों प्रशानिक अधिकारियों और व्यवस्था के संचालकों को आगाह कर चुके हैं कि यहां बेतरतीब तरीके से होने वाला शहरीकरण मानवता के लिए हर लिहाज से खतरा है, तो फिर क्या उस पर कोई ठोस फैसला लेने की बजाय हमें सिर्फ मानसून के दौरान ही सजगता दिखाने की जरूरत है या सही मायनों में इस विषय पर गंभीरता से काम करते हुए इतिहास की पुनरावृति न हो और भविष्य में मानवता पर आने वाला संकट टाला जा सके उस दिशा में अग्रसर होना चाहिए, अगर हां तो फिर इस दिशा में सख्ती से क्यों नहीं निपटा जा रहा और क्यों इस पर किसी समय विशेष में काम होता है सारा साल भर क्यों नहीं… इस यक्ष प्रश्न का जवाब मिलना बेहद जरूरी है
ब्यूरो रिपोर्ट DMI न्यूज़ हिमाचल

प्री मानसून ने खोल दी प्रशासन की तैयारियों की पोल, समय पर दुरुस्त नहीं हो पा रहे हाइवेज

धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) – जहां एक और मानसून दस्तक देने जा रहा है वहीं दूसरी ओर प्री मानसून ने अभी से अपनी रंगत दिखानी शुरू कर दी है है, दरअसल कांगड़ा धर्मशाला में आज सुबह से ही प्री मानसून की बरसात देखने को मिल रही है, कांगड़ा के कई हिस्सों में जहां हल्की बूंदाबांदी और बारिश हो रही है वहीं धर्मशाला में सुबह से ही झमाझम बारिश जारी है, नतीजतन धर्मशाला से गग्गल को जोड़ने वाला बाया चैतङू हाइवे मार्ग भारी भूस्खलन की जद्द में आ गया है, लगातार बारिश के कारण इस मार्ग पर पहले से ही पहाड़ियों की अंधाधुंध खुदाई के चलते आज वहां से ल्हासे गिरने से वाहन अवरुद्ध हो गए हैं और अब रोजमर्रा और दैनिकचर्या के लिए निकलने वाले लोगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है, खबर लिखे जाने तक खुद को 24 घंटे चौकन्ना रहने का दावा करने वाला PWD का कोई भी शख़्स या मशीनरी मौके तक नहीं पहुंच पाई, जिसके चलते वाहन चालकों और कई सरकारी गैर सरकारी मुलाजिमों को अपने गंतव्यों तक समय पर पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा 
ब्यूरो रिपोर्ट DMI.

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