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डीसी कांगड़ा ने उठाया कांगड़ा को स्वच्छ बनाने का बीड़ा
भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को प्लास्टिक मुक्त करने की दिशा में बहुत बड़ा अभियान छेड़ा गया है, इसी के तहत कांगड़ा के धर्मशाला में जिला प्रशासन की ओर से आज डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने हरि झंडी दिखाकर इस अभियान की शुरूआत की, इस दौरान डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने कहा कि जिलाभर के तमाम ब्लॉक में इस अभियान की शुरूआत की गई है, समूचे जनपद में जहां भी बड़े ब्लॉक हैं वहां पर प्लास्टिक बेस्ट मैनेजमेंट यूनिट तैयार की जा रही हैं ताकि वो जगह जगह से प्लास्टिक कूड़ा इकट्ठा करके एक जगह एकत्रित किया जा सके…
जिलेभर के तमाम बीडीओ संभालेंगे कमान
हेमराज बैरवा ने बताया कि एक जगह इक्टठा किया गया कूड़ा फिर सिमेंट प्लांट में भेजा जाता है ताकि उसे वहां रियूजेवल बनाया जा सके…हेमराज बैरवा ने सभी पंचायतों से अपील की है की वो समूहों में प्लास्टिक बेस्ट को उठाने का प्रबंधन करें ताकि वहां से उनकी मैनेजमेंट कमेटियां वहां से उठाकर उचित स्थान तक ले जा सकें…जिलाधीश ने कहा कि इसके लिये बकायदा एक सैग्रिगेशन सैड भी बनाया गया है…और इस शैड में अलग अलग कूड़े के निस्तारण का प्रावधान तैयार किया गया है…
पंचायत स्तर पर तैयार होगा प्लास्टिक मुक्त मैकेनिज्म
उन्होंने कहा कि कूड़े के निस्तारण की प्रक्रिया तो उन्होंने तैयार कर ली है अब इसके लिये आर्थिक और क्रियान्वयन क्षेत्र भी बहुत महत्वपूर्ण रहता है जिसके लिये 15वें वित्त आयोग की ओर से दिशा निर्देशों के तहत पंचायत समीतियों को धन का प्रावधान किया गया है जिसे एक विशेष मैकेनिज्म के तहत प्रयोग करने की भी गाइडलाइंस हैं…जिलाधीश ने बताया कि तमाम ब्लॉक अधिकारियों को इस बाबत पूरी जानकारी साझा की गई हैं और वहीं इस मैकेनिज्म को पंचायतों में पहुंचाने का काम कर रहे हैं…उन्होंने कहा कि उनकी ओर से प्लास्टिक बेस्ट को मैनेज करने की गाइडलाइंस बनाई हैं जिसके तहत कुछ घरों, दुकानदारों और बाकि व्यवसायियों के लिये नॉर्मल फीस रखी है ताकि इस कार्य को अंजाम तक पहुंचाया जा सके, धर्मशाला में ये कार्य प्रगर्ति पर है, हेमराज बैरवा ने कहा कि धर्मशाला में चार अलग अलग बैंडर इस कार्य को अंजाम तक पहुंचाने का काम करने में जुट गये हैं…
रिपोर्टर- बिंटू शर्मा, धर्मशाला
एडिट्ड- अभिषेक
पैराग्लाइडिंग उड़ान में नियमों की अवहेलना करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाइ - DC
पैराग्लाइडिंग साईट्स पर तैनात मार्शल रखें हर गतिविधि पर नजर
कांगड़ा में पैराग्लाइडिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स को लेकर नियम हुये सख्त ?
धर्मशाला-29 MARCH 2025-शनिवार- जिला कांगड़ा में पैराग्लाइडिंग और उससे संबंधित गतिविधियों के संचालन के लिये अब जिला प्रशासन की ओर से कड़े प्रतिबंध कर दिये गये हैं…अब अगर कोई इस तरह की गतिविधियों का संचालन करना चाह रहा है तो उन्हें हर लिहाज़ से उसके नियमों का पालन करना पड़ेगा…जनपद में अगर कोई पायलट, ऑपरेटर और एसोसिएशन पैराग्लाडिंग उड़ान से संबंधित नियमों की अवहेलना करते हुए पाया जाता है तो उसपर नियामक समिति द्वारा जुर्माना लगाया जाएगा साथ ही नियमानुरूप दंडात्मक कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी…
क्या कहते हैं जिलाधीश कांगड़ा हेमराज बैरवा ?
हमारी पर्यटन गतिविधियों में एयरो स्पोर्ट्स गतिविधियां विशेषकर पैराग्लाइडिंग विश्वभर से पर्यटकों को आकर्षित करती है… इसलिए पैराग्लाइडिंग के संचालन से संबंधित पर्यटकों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। उपायुक्त ने पैराग्लाइडिंग ऑपरेटरों को निर्देश दिए कि पैराग्लाइडिंग की उड़ाने निर्धारित समय पर ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि बहुत बार देखने में आया है कि पैराग्लाइडिंग पायलट उड़ान के लिए मनमर्जी करते हैं और निर्धारित समय के अवाला भी उड़ान भरते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ पायलट खराब मौसम में भी उड़ान भरते हैं। उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पायलट निर्धारित उड़ानों से ज्यादा उड़ान न भर सके।

अब यहां होगी मार्शलों की तैनाती ?
उपायुक्त ने कहा कि जिले में पैराग्लाइडिंग साइट्स पर मार्शल की तैनाती की गई है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार मार्शलों की तैनाती आवश्यक है, जिससे किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके तथा त्वरित कार्रवाई को अंजाम दिया जा सके। उन्होंने मार्शलों के माध्यम से पैराग्लाइडिंग गतिविधियों पर नज़र रखने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने कहा कि जो भी ऑपरेटर या पायलट नियमों का उल्लंघन करते हुए लोगों की जान खतरे में डालते हैं, उसके विरुद्ध नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें आर्थिक दंड के अलावा लाइसेंस तक रद्द किए जाएंगे।धर्मशाला से डिजी मित्रा इंडिया के लिए अभिषेक की रिपोर्ट
समाज में महिला सशक्तिकरण का पर्याय हैं रैत की सुदर्शना देवी
धर्मशाला (हि.प्र) कहते हैं हीरे की कीमत जौहरी ही जानता है, ठीक वैसे ही जिन साजो-सामान या वस्तुओं को हम किसी काम का नहीं समझते उनको कलाकार लोग अपने हुनर से उस मुकाम तक पहुंचा देते हैं जहां न केवल वो आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं बल्कि बेशकीमती भी हो जाते हैं…हिमाचल प्रदेश के जनपद कांगड़ा की तहसील शाहपुर के ब्लॉक रैत निवासी सुदर्शना ने अपने हुनर का कुछ ऐसा ही परिचय दिया है कि आज उन्होंने जंगलों में सिर्फ नुकसान का पर्याय मानी जाने वाली चीड़ की पत्तियों को अपनी शिल्पकारी से वो आकार दिया है कि आज वो हाथोंहाथ बिक रही हैं…
चीड़ की पत्तियों से तैयार हो सकता है सजावटी सामान सुदर्शना ने सिखाया
एक स्टॉल पर रखा ये सजावटी सामान देखने में भला किसे अपनी ओर आकर्षित नहीं करेगा…इस सजावटी सामान को भला कौन खरीदना नहीं चाहेगा इसलिये क्योंकि घर में इस तरह के साजो-सामान की एक तो दरकार रहती ही है दूसरा ये कि जिस वस्तु से ये तैयार किया गया है वो बेहद इको फ्रैंडली है और इसमें खाने-पीने की वस्तुओं को भी रखा जा सकता है…
साल 2007 में शुरू किया था चीड़ की पत्तियों को तराशना
दरअसल रैत निवासी सुदर्शना देवी शिल्पकारी में वो शख्सियत हैं जो एक हाथ से दिव्यांग होने के बावजूद भी आज की तारीख में दूसरी महिलाओं के लिये प्रेरणा का स्त्रोत हैं, दरअसल दो दशक से भी पहले सुदर्शना देवी ने जंगलों में पाई जाने वाली उन चीड़ की पत्तियों को अपने हुनर में पिरोने शुरू कर दिया था जब इस दिशा में शायद यहां के लोगों का ध्यान ही नहीं जाता था, साल 2007 से सुदर्शना उन चीड़ की पत्तियों को अपने हुनर से आकार देती आ रही हैं जो पत्तियां जंगलों में सिर्फ जंगली वनस्पती को खत्म करने का काम करती थीं इतना ही नहीं आग में घी का काम करने वाली लोकोकती में भी कहीं न कहीं इशारा इन्हीं पत्तियों की ओर होता आया है…जो जंगलों में करोड़ों की वन संपदा को पल भर में राख की ढेरी में तब्दील करने का काम किया करती थीं, बावजूद इसके इन्हीं पत्तियों को घर के सजावटी सामान में कैसे बदला जाये ये आज की तारीख में सैकड़ों महिलाओं को सुदर्शना देवी ने सिखाया है…आज सुदर्शना देवी अपने क्षेत्र में किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं और आज उनकी रहनुमाई में 1 सौ से भी ज्यादा महिलाएं काम कर रही हैं…
किस बात का है शिल्पकार सुदर्शना को मलाल
सुदर्शना देवी की मानें तो उन्हें इस बात का बेहद मलाल है कि जो चीड़ की पत्तियां जंगलों में जंगली वनस्पती को उजाड़ने का काम करती है आज उसे प्रोटेक्ट करके इस तरह के निर्माण कार्यों में प्रयोग लाने की दिशा में कोई ख़ास कार्य नहीं हो रहा और जो लोग अपने स्तर पर कार्य कर रहे हैं उनके प्रोडक्ट्स को एक उचित मार्केट नहीं मिल पा रही, नतीजतन जो प्रयास उनकी ओर से चीड़ की पत्तियों की मार्फत प्रोडक्ट्स बनाने में किये जा रहे हैं वो नाकाफी हैं ऐसे में सरकार प्रशासन को इस दिशा में ज्यादा से ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है
आज हुनर से हुनरमंदों की मसीहा बनी हैं सुदर्शना
काबिलेगौर है कि साल 2018 में हिम ऑफ द स्टेट अवार्ड हासिल कर चुकी सुदर्शना को आज रोल मॉडल के तौर पर सरकार-प्रशासन की ओर से आयोजित बड़े बड़े जलसों, सेमिनारों और कार्यक्रमों में उनके द्वारा तैयार किये प्रोडक्ट्स के साथ बुलाया जाता है ताकि उनके प्रोडक्ट्स को प्रदर्शनियों में डिस्पले करके अन्य लोगों को भी इस दिशा में प्रोत्साहित किया जा सके…
ब्यूरो रिपोर्ट डीजि मित्रा इंडिया डेस्क
कल से शुरू होंगी बोर्ड परीक्षाएं, HPBOSE ने मुकम्मल की तमाम तैयारियां
धर्मशाला- हिमाचल प्रदेश में कल यानी मंगलवार से 10 और 12वीं के बोर्ड की परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं, जिसको लेकर प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने तैयारियां मुकम्मल कर ली हैं…मौसम की बेरुखी के चलते प्रदेश के दो जनजातीय क्षेत्र पांगी और लाहौल स्पिति को छोड़ बाकि तमाम क्षेत्रों में कल से सालाना बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी…
इस बार इतने विद्यार्थी देंगे परीक्षाएं
इस बार प्रदेशभर में 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में 1 लाख 95 हजार के करीब परीक्षार्थियों की एनरोलमेंट हुई है…जिनके लिये प्रदेशभऱ में पिछले सेशन 2023-24 के लिये 2 हजार 250 परीक्षा केंद्र बनाये गये थे जबकि इस बार 23 सौ परीक्षा केंद्र बनाये गये हैं जिनमें 50 परीक्षा केंद्र नये जोड़े गये हैं…इस बाबत जानकारी देते हुये स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन मेजर विशाल शर्मा ने बताया कि परीक्षाओं में पारदर्शिता बनी रहे और नकल फ्री परीक्षा हो इसके लिये शिक्षा बोर्ड ने हर साल की मानिद इस बार भी खूब सतर्कता बरती है, परीक्षा में नकल को लेकर जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अख्तियार की गई है…




क्या कहते हैं बोर्ड सचिव मेजर डॉ. विशाल शर्मा
विशाल शर्मा ने बताया कि बोर्ड ने अपने स्तर पर फ्लाइंग स्कॉड टीमों का गठन किया है इसके लिये हर परीक्षा केंद्र सीसीटीवी से लैस होंगे जिनका रिमोट कंट्रोल उनके हाथ में रहेगा ताकि हर परीक्षा केंद्र को रेंडमली वो ऑबजर्व कर सकें, वहीं उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर वहां के प्रशासनिक अधिकारियों को भी फ्लाइंग स्कॉड बनाकर परीक्षा केंद्रों में नकल रोकने की अपील की गई है…विशाल शर्मा ने बताया कि प्रदेश में परीक्षाओं के दौरान किसी तरह से कोई बदमाशी या हुड़दंगबाजी की आज तक उनके कार्यकाल में कोई शिकायत नहीं मिली है ऐसे में इस तरह की कोई संभावना भी नहीं है फिर भी अगर कहीं से ऐसी कोई जानकारी मिली तो वहां सख्त एक्शन लिया जायेगा इसको लेकर भी बोर्ड पूरी तरह से तैयार है….
बाइट- मेजर डॉ विशाल शर्मा, सचिव, HPBOSE, धर्मशाला




मेरा गांव मेरा स्वाभिमान के बैनर तले फ्री कोचिंग सेंटर खोलने की लगी होड़
सूबे के ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा हासिल कर रहे नौनिहाल प्रतियोगी परीक्षाओं में अपना परचम लहरा सकें इस सोच के साथ काम कर रही गैर सरकारी संस्था मेरा गांव मेरा स्वाभिमान ने जनजातीय क्षेत्र भरमौर की कुछ पंचायतों से फ्री कोचिंग का जो मिशन शुरू किया है, उसको लेकर पढ़े-लिखे बेरोजगारों में खूब उत्साह नजर आने लगा है…बेरोजगार युवा न केवल संस्था के इस नेक काम की सराहना करने लगे हैं बल्कि संस्था के साथ जुड़कर खुद भी समय निकालकर बच्चों को शिक्षित करने की इच्छा जाहिर करने लगे हैं…इसके लिये बाकायदा कई पंचायतों से युवा वर्ग संस्था के पदाधिकारियों के साथ संपर्क साध कर उनके यहां भी फ्री कोचिंग सेंटर खोलने की मांग करने लगे हैं…जिसके लिये जनजातीय क्षेत्र भरमौर की जगत, सामरा, औरा-फाटी समेत कई पंचायतों से आवेदन आ चुके हैं…





औरा-फाटी से एसएमसी प्रधान ने शुरू किया कार्य
मेरा गांव मेरा स्वाभिमान संस्था द्वारा नौनिहालों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिये शिरड़ी पंचायत से शुरू किया गया ये अभियान अब एक-एक कर हर पंचायत में पहुंचने लगा है…अबकी बार औरा-फाटी पंचायत में भी एक नया सेंटर खुल गया है जहां बच्चों ने कोचिंग लेनी शुरू कर दी है…औरा-फाटी पंचायत के प्राइमरी स्कूल औरा में कार्यरत अध्याप्क और एसएमसी प्रधान सुरजीत कुमार ने संस्था के इस पुनीत कार्य की सराहना करते हुये, अपने निजी मकान में संस्था के बैनर तले फ्री कोचिंग सेंटर खोल दिया है जिसमें बच्चों को शाम के साढ़े 4 बजे से लेकर साढ़े 5 बजे तक मुफ्त कोचिंग प्रदान करनी भी शुरू कर दी है..
संस्था के चेयरमैन मेद सिंह की सराहना
औरा फाटी पंचायत के जागरूक युवा और एसएमसी प्रधान सुरजीत कुमार ने बताया कि मेद सिंह जैसे शख्स समाज को बिरले से ही मिलते हैं…उन्होंने कहा कि वो मेद सिंह को तब से जानते हैं जब से वो कॉलेज़ में पढ़ाई के साथ-साथ खेती-बाड़ी में भी बेइंतहा दिलचस्पी रखते थे, शायद यही वजह थी कि उन्हें उस दौर में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष पंडित तुलसी राम जी ने पूरे भरमौर क्षेत्र में सर्वोत्तम किसान के तौर पर चुना था और बाकि किसानों के लिये रोल मॉडल भी बताया था…सुरजीत कुमार ने बताया कि तब से मेद सिंह उनके लिये प्रेरणा स्त्रोत हैं और जब आज उन्हें पता चला कि मेरा गांव मेरा स्वाभिमान उनकी संस्था है और वो मुफ्त बच्चों को कोचिंग प्रदान कर रहे हैं तो उन्होंने तुरंत इस दिशा में कदम बढ़ाते हुये अपने यहां भी कोचिंग सेंटर खोलने की इच्छा जाहिर की और उन्होंने इसके लिये तुरंत हामी भी भर दी और आज उन्होंने ये नेक कार्य शुरू कर दिया है…





किसे मिलेगी मुफ्त की कोचिंग
मेरा गांव मेरा स्वाभिमान यानिकी नाम से ही विद्दित है कि अपना गांव ही अपना स्वाभिमान है, संस्था के संचालक ने इस संस्था को समाज के उत्थान के लिये समर्पित करते हुये सबसे पहले इसके बैनर तले गांव के उन बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया है जो किसी भी लिहाज़ से गांव से बाहर जाकर प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग नहीं ले सकते, मगर वो नवोदय, सैनिक स्कूल, केवीएस या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेना चाहते हैं, उनके लिये अब उन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं रहेगी क्योंकि अब संस्था द्वारा गांव में ही स्वयं सेवियों को इस दिशा में कार्य करने के लिये तैयार किया जायेगा जो गांव में ही रहकर न केवल संस्था के बैनर तले मुफ्त कोचिंग सेंटर खोलेंगे बल्कि इसी संस्था के बैनर तले स्वावलंबी होकर स्वंय के स्वरोजगार की पढ़ाई करते हुये देश और प्रदेश के कर्णधारों को उनकी दशा और दिशा तय करने में भी मदद करेंगे
ब्यूरो डैस्क से बिंटू शर्मा की रिपोर्ट
जनजातीय क्षेत्र भरमौर के शिरड़ी में खुला पहला निशुल्क कोचिंग सेंटर:
"मेरा गांव मेरा स्वाभिमान संस्था ने उठाया सराहनीय कदम"



भरमौर– हिमाचल प्रदेश के गैर सरकारी संगठन मेरा गांव मेरा स्वाभिमान के अध्यक्ष मेद सिंह ने सूबे के बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के साथ जोड़ने और गरीब और पिछड़े परिवारों के बच्चों को निशुल्क कोचिंग देने समेत उनके बीच में शिक्षा की लौ जगाने का संकल्प लिया है…इसी कड़ी में उन्होंने सबसे पहले प्रदेश के आकांक्षी जिला चम्बा के जनजातीय क्षेत्र भरमौर स्थित अपनी पैतृक पंचायत शिरड़ी को गोद ले लिया है और वहां बाकायदा अपने इस गैर सरकारी संगठन मेरा गांव मेरा स्वाभिमान के बैनर तले पहला निशुल्क कोचिंग व परामर्श केंद्र भी स्थापित कर दिया गया है…जिसमें इस पंचायत के पढ़े-लिखे युवाओं ने जहां स्वंय सेवक के तौर पर अपनी स्किल को बढ़ाने के लिये इस बैनर तले उन बच्चों को निशुल्क पढ़ाने का कार्य शुरू कर दिया है वहीं कई बच्चों ने इन दिनों जनजातीय क्षेत्रों में चल रहे अवकाश को मद्देनजर रखते हुये इस कोचिंग सेंटर में स्कूली पढ़ाई के अतिरिक्त प्रतियोगी परीक्षाओं और अपने सबजेक्ट से संबंधित पाठ्यक्रमों को दोहराने की कोचिंग लेनी शुरू कर दी है…



हर तरफ हो रही मेरा गांव मेरा स्वाभिमान NGO की चर्चा
गैर सरकारी संगठन मेरा गांव मेरा स्वाभिमान द्वारा लिये गये इस फैसले की अब न केवल जनजातीय क्षेत्र भरमौर में तारीफ हो रही है बल्कि उससे बाहर भी लोग इस फैसले की सराहना करने लगे हैं…कई इलाकों से कई अभिभावक इस संगठन से जुड़ी टीम के सदस्यों को फोन कॉल करके उनके क्षेत्रों में भी इस तरह से कोचिंग सेंटर खोलने की मांग करने लगे हैं साथ ही बहुत से बेरोजगार पढ़े लिखे युवा भी इस बैनर के साथ जुड़कर इस तरह के पुनीत कार्य में अपना निस्वार्थ योगदान देने की अपील कर रहे हैं…
गैर सरकारी संगठन मेरा गांव मेरा स्वाभिमान द्वारा लिये गये इस फैसले की अब न केवल जनजातीय क्षेत्र भरमौर में तारीफ हो रही है बल्कि उससे बाहर भी लोग इस फैसले की सराहना करने लगे हैं…कई इलाकों से कई अभिभावक इस संगठन से जुड़ी टीम के सदस्यों को फोन कॉल करके उनके क्षेत्रों में भी इस तरह से कोचिंग सेंटर खोलने की मांग करने लगे हैं साथ ही बहुत से बेरोजगार पढ़े लिखे युवा भी इस बैनर के साथ जुड़कर इस तरह के पुनीत कार्य में अपना निस्वार्थ योगदान देने की अपील कर रहे हैं…

“क्या कहते हैं संस्था के संचालक मेद सिंह”
गैर सरकारी संगठन मेरा गांव मेरा स्वाभिमान के संचालक मेद सिंह ने डीजि मित्रा इंडिया मीडिया (DIGI MITRA INDIA MEDIA) टीम के साथ बातचीत करते हुये कहा कि उनका जन्म जनजातीय क्षेत्र भरमौर के भी जनजातीय गांव शिरड़ी में हुआ उन्होंने बचपन से ही अपना जीवन संघर्षों से ही घिरा हुआ पाया और उन संघर्षों ने इस जीवन में उन्हें जो सबक सिखाया उससे प्रेरणा लेकर उन्होंने यही संक्लप लिया है कि जिस दिन भी वो पूर्ण रूप से सामर्थ्यवान बनेंगे वो इन क्षेत्रों के लोगों को उस संघर्ष से बाहर निकालने के लिये हरसंभव प्रयास करेंगे, आज जब वो कुछ सामर्थ्यवान हुये हैं तो उन्होंने सबसे पहले ग्रामीण क्षेत्रों के उत्थान के लिये मेरा गांव मेरा स्वाभिमान संगठन की संरचना की और उसी के बैनर तले सबसे पहले अपनी ही पंचायत को गोद लेकर वहां के उन बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया है जो बच्चे बाहर जाकर कोचिंग नहीं ले पाते या सामान्य क्षेत्रों की माफिक अपने पाठ्य पुस्तकों से संबंधित ट्यूशन पढ़ने नहीं जा पाते हैं, उन्होंने इसी को ध्यान में रखते हुये पहले चरण में शिरड़ी पंचायत में निशुल्क कोचिंग सेंटर की स्थापना की है और भविष्य में वो इस पुनीत कार्य को और भी बड़े लेवल पर लेकर जाएंगे ताकि गांवों के बच्चों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये तैयार किया जा सके उन्हें भी घर द्वार निशुल्क कोचिंग प्रदान की जा सके…मेद सिंह ने बताया इसी तर्ज पर उन्होंने बच्चों की स्किल डवलपमेंट के लिये भी डीएफल वॉरियर जैसे मेगा प्रोग्राम की संरचना तैयार की है जो निश्चित तौर पर भविष्य में हमारे बेरोजगार पढ़े-लिखे बच्चों की न केवल स्किल डवलपमेंट करेगी बल्कि उन्हें आर्थिक तौर पर भी सशक्त बनाने में अहम भूमिका अदा करेगी। मेद सिंह ने बताया कि उनका मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में सोशियो-इकोनॉमिक समानता लाना है और इसी को ध्यान में रखते हुये उन्होंने मेरा गांव मेरा स्वाभिमान संस्था की संरचना की है।

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